Naag Panchami Puja Vidhi and Kaal Sarp Dosh

Naag Panchami(नाग पंचमी)- 19th August, 2015

Panchami Tithi Begins = 05:53 on 19/Aug/2015

Panchami Tithi Ends = 08:26 on 20/Aug/2015


Shukla Paksha Panchami during Sawan month is observed as Nag Panchami. It is the day of worshipping Naag Devata. Before starting the puja make a naag devata using clay or cow dung or 'geru'.

Then perform panch upchar puja and offer milk, durva, kusha, flower, akshat(rice), laddu (sweets) and chant the mantra
' Om Navkulaye Vidmahe Vishdantaye Dheemahi Tanno Sarp Prachodayat '
at least 21 times to get rid of any kind of enmity or obstacles in life. Worship of Naag Devta in any Shiv Temple is highly beneficial for those who suffer from Kaal Sarp Yoga! Please do it before sunset.

नाग पंचमी के दिन उपवासक अपने घर मिट्टी या गोबर या गेरू से पांच सिर वाले नाग देवता बनाए. इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुशा, गन्ध, फूल, अक्षत, लड्डूओं सहित पॅंच उपचार से उनकी पूजा करके कम से कम 21 बार नाग मंत्र  "ओम नावकूलाए वीदमहे विषदंताए धीमाही तान्नो सर्प प्रचोदयत"  का जाप किया जाता है.

इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का एक बार पाठ करे
Naag Panchami Mantra

नागों को धारण करने वाले भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करना भी इस दिन विशेष रुप से शुभ माना जाता है. जिन व्यक्तियों की कुण्डली में "कालसर्प दोष' या 'सर्प दोष' बन रहा हों, उन्हें इस दोष की शान्ति के लिये उपरोक्त बताई गई विधि से नाग पंचमी के दिन उपवास व पूजा-उपासना करना, लाभकारी रहता है. काल सर्प योग से पीडिय व्यक्तियों को इस दिन नाग देवता की पूजा अवश्य करनी चाहिए. छाया ग्रहो राहु केतु का किसी जन्म कुंडली मे अशुभ स्तिथि मे होना बोहुत बड़ी समस्या बन सकता है दोनो ही जिसके साथ जुड़ जाते है उसका प्रभाव बढ़ा देते है वो अच्छा या बुरा दोनो हो सकता है.

August 18 व 19 को नाग चतुर्थी व नागपंचमी तिथि है ये दोनो दिन सर्प दोष को दूर करने मे सहायक हो सकते है. नाग बोहुत ही रहस्यमयी जीव होते है जो सर्प के रूप मे श्राप दे भी सकते है और श्राप समाप्त भी कर सकते है. कभी भी किसी सर्प की हत्या नही करनी चाहिए या उसे घायल नही करना चाहिए, ये कुंडली मे सर्प दोष को प्रबल कर देता है. सर्प दोष की वजह से विवाह मे विलंब, सांतक का स्वास्थ्य खराब रहना , स्वयं व्यक्ति को असाध्या रोग होना है.

राहु और केतु दोनो संयुक्त रूप से बोहुत सी मानसिक बीमारियों, असाध्या रोगो, नकारात्मक शक्तियों, जीवन के छुपे हुए पक्षो के प्रति झुकाव और अचानक आने वाली विपदाओ के कारण होते है

नाग चतुर्थी व पंचमी के दिन उपासना कर इन प्रभाव को कम किया जा सकता है. इस वर्ष चंद्र राहु के साथ युति कर रहा है है और शनि ही राहु-केतु axis से बाहर निकाला हुया है, अर्थात इस दिन राहु-केतु प्रबल और बाकी ग्रह अपेक्षाकृत कमजोर है. अतः इस दिन नाग पूजा करने से नाग देव प्रसन्न होते है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है. पूर्ण श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास में धरती खोदने का कार्य नहीं किया जाता है. इसलिये इस दिन भूमि में हल चलाना, नींव खोदना शुभ नहीं माना जाता है. भूमि में नाग देवता का घर होता है. भूमि के खोदने से नागों को कष्ट होने की की संभावनाएं बनती है.