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यदि किसी घर-परिवार में अक्सर परेशानियां बनी रहती है परिवार का कोई न कोई सदस्य हमेशा बीमार या अस्वस्थ रहता है। धन संबंधी परेशानियां बनी रहती है। छोटे- छोटे कार्य भी बड़ी कठिनाई से पूर्ण होते हैं तब संभव है कि उस घर में कोई वास्तुदोष हो, कोई नकारात्मक शक्ति सक्रिय हो। इस प्रकार के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए यह उपाय अपनाएं।

वास्तु संबंधी दोष को दूर करने और घर के वातावरण में फैली नकारात्मक ऊर्जा को प्रभावहीन करने के लिए वातावरण को शुद्ध और पावन बनाना चाहिए।
इसके लिए सुबह-सुबह घर में लोबान, गुग्गल, कपूर, देशी घी एवं चदंन का चुरा एक साथ मिलाकर के कंडे पर धुनी दें । पूरे घर में इस धुनी का धुआं फैलाएं।
इसके प्रभाव से वातावरण में फैली नकारात्मक शक्तियां प्रभावहीन हो जाएंगी और सकारात्मक शक्तियां का प्रभाव बढ़ेगा।

घर के लिए वास्तु सलाह :- 

- घर में कभी भी बड़ी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। मूर्ति की अधिकता लम्बाई गृहस्वामी के बारह अंगुल ही होनी चाहिए।

- घर के अंदर पूजास्थल में किसी देवता की एक से अधिक मूर्ति नहीं रखनी चाहिए।

- सवेरे पूर्व दिशा में व रात्रि के समय पश्चिम दिशा में मलमूत्र विसर्जन करने से सिर दर्द का रोग होता हैं, इससे बचें।

- ध्यान रहे पूर्व की तरफ मुँह करके भोजन करने से आयु, दक्षिण की तरफ मुँह करके भोजन करने से पे्रम, पश्चिम की तरफ मुँह करके भोजन करने से रोग एवं उत्तर की तरफ मुँह रकके भोजन करने से धन व आयु की प्राप्ति होती हैं।

- घर के अन्दर सात्विक प्रवृति के पक्षियों के जोड़े वाला चित्र रखें, इससे परिवार में वातावरण माधुर्यपूर्ण रहेगा।

- मकान के उत्तर-पूर्वी भाग में शौचालय नहीं होना चाहिए, इससे आर्थिक संकट व संतान सुख में कमी आती है। कई बार तो पति-पत्नी में तलाक तक की स्थिति आ जाती है या मुकद्दमे बाजी से धन हानि संभव है।

- रसोई घर ऊँचा चबूतरा या कोण कटा हुआ हो तो भी दाम्पत्य सुख नहीं मिलता है। इस क्षेत्र में पूजाघर, पानी का कुण्ड अच्छा रहता है। इस कोण पर मार्ग प्रहार भी शुभ होता हैं।

- भारी पत्थर व भारी मूर्तियां दक्षिण तथा पश्चिम दिशा में तब रखे जा सकते हैं जब दक्षिण तथा पश्चिम में कोई भारी सामान रखने के लिए उपलब्ध न हो। ये मूर्तियां या पत्थर ऐसे दिखने चाहिए जैसे इन्हें सजावट के लिए रखा गया हो। पश्चिम एवं दक्षिण दिशा को भारी करने पर घर, फैक्टरी या रोजगार के स्थान पर स्थायित्व आता है। पति-पत्नी में अलगाव रहता है या कार्य पूर्ण रूप से नहीं चलने के कारण मानसिक परेशानी रहती है, तो भी यह उपाय कारगर साबित होता है।

खिड़कियां सही स्थान पर होती हैं, तो हवा का संतुलन बना रहता है। मकान या कमरे में उत्तर या पूर्व की ओर लगी हुई खिड़कियां धन और उत्तम स्वास्थ्य को देने वाली होती हैं। इन्हें खुला रखना लाभदायक होता है। पश्चिम तथा दक्षिण की खिड़कियों व दरवाजों पर भारी पर्दे तथा पूर्वी व उत्तरी दरवाजों पर हल्के व बारीक पर्दों का प्रयोग लाभदायक होता है।

- देवी-देवताओं के चित्र तथा सजावटी चित्र उत्तरी या पूर्वी दीवार पर लगायें। पूर्वी तथा उत्री दीवार पर स्वर्गवासी व्यक्ति का वित्र न लगायें। इसके लिए दक्षिणी दीवार अधिक उपयुक्त होती है।

- भारी दिखने वाले जैसे पहाड़, घने जंगल आदि के चित्र पश्चिम या दक्षिणी दीवार पर ही लगायें। युद्घ के चित्र बिना सिर-पैर की मूर्तियां, कबूतर, सांप, सूअर आदि ऐसे चित्र अशुभ माने गये हैं।

- मधुर संगती व गीत भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। कर्णभेदी संगीत नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। मधुर संगीत को ही घर में जगह दें।

- सीढिय़ां भवन में गलत जगह पर होती हैं तो दोष उत्पन्न करती हैं। भवन में सीढिय़ां दक्षिण-पश्चिम या नैर्ऋत्य कोण में बनाना दक्षिण-पश्चिम या नैर्ऋत्य कोण में बनाना शुभ होता है। ईशान तथा मध्य में सीढिय़ां बनाना दोषमुक्त माना गया है। सीढिय़ां उपरोक्त दिशा में न हों, तो ऐसे में सीढिय़ों के प्रवेश का स्थान सुविधाजनक लम्बा कर लें और उसे दक्षिण, पश्चिम या नैर्ऋत्य कोण से शुरू करें। इसके लिए दीवार बनाना संभव न हो तो सजावटी पौधों आदि के गमलों की पंक्तियां लगाकर सीढिय़ों का प्रारंभिक स्थान उपरोक्त दिशा में ले जायें।

- रसोईघर में गैस का चूल्हा रसोईघर की दायीं तरफ खिडक़ी के पास न रखें। इससे गृहस्वामी को बहुत जल्दी गुस्सा आता है। वह हमेशा अपना काम जल्दबाजी से करता है। जिससे कार्य गलत हो जाता है।

- पृथ्वी तत्व की कमी होने पर घर के नैर्ऋत्य कोण में भारी वस्तुएं रखें। नैर्ऋत्य कोण की दीवार मजबूत करें। नैर्ऋत्य कोण में पहाड़ों की तस्वीर लगायें। शयन कक्ष नैर्ऋत्य कोण में बनवायें।

- घर के सभी कमरे बड़े और प्रकाश एवं हवा का पर्याप्त संतुलन होने पर गृहस्वामी को जमीन से हमेशा लाभ प्राप्त होता है और हर क्षेत्र में उसे लाभ होता है

- शयन कक्ष में मंदिर न रखें और न ही पूर्वजों की तस्वीर टांगें। डरावने जानवरों की प्रतिमाएं भी इस कक्ष में न रखें।

- घर के कमरों में से होकर गंदा पानी जाता है तो ऐसे घर में रहने वाले गृहस्वामी को भोजन का आनंद नहीं मिलता है और शादी के बाद उसे अनेक मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

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