2014 me 12 Rashiyon Par Shani Ka Prabhav

ब्रह्मांड का सबसे रहस्मय ग्रह शनि साल 2014 में तुला व वृश्चिक राशि में चलायमान रहेगा। उससे पहले शनि तुला राशि में 2 मार्च से 3 अगस्त 2014 तक व्रत गति में परिभ्रमण करेंगे। शनि का परिभ्रमण भिन्न-भिन्न राशियों को अलग-अलग प्रकार से प्रभावित करेगा।
किन-किन राशियों को शनि की इस वर्ष साढ़ेसाती और किन राशियों पर ढैय्या रहेगी। किन राशियों के लिए शनि शुभ रहेगा व किन राशियों के लोगों को शनि के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा।

मेष राशि- साल 2014 में शनि आपकी राशि से सप्तम स्थान पर 2 नवंबर 2014 तक भ्रमण करेंगे। सप्तम भाव में शनि की स्थिति कार्यक्षेत्र व आजीविका की स्थिति ठीक-ठाक रखेगी परंतु पारिवारिक दृष्टि से यह समय आपके लिए काफी उत्तेजनापूर्ण रहेगा। संतान व बड़े बुजुर्गों को लेकर चिंता की स्थिति बनेगी। पति-पत्नी में मतभेद संभव है। बिजनेस में किसी पर ज्यादा भरोसा न करें।
2 मार्च से 3 अगस्त 2014 के मध्य शानिदेव अपनी वक्र गति पर रहेंगे। इस समय कारोबार में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें। क्रोध व वाणी पर काबू रखें अन्यथा धन हानि हो सकती है। 2 नवंबर 2014 से शनि की ढैय्या आपको लग जाएगी। आठवां शनि करियर व काम-काज को लेकर तनाव पैदा करेगा। मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिलेगा।

उपाय
1- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न(नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।
2- शनि यंत्र के साथ नीलम या फिरोजा रत्न गले में लॉकेट की आकृति में पहन सकते हैं, यह उपाय भी उत्तम है।
3- किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के तंत्रोक्त, वैदिक मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। ये है शनि का तंत्रोक्त मंत्र-
ऊँ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम:
4- शनिवार को व्रत रखें। चींटियों आटा डालें।
5- जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।


वृषभ राशि- साल 2014 में शनि वृषभ राशि से छठे व सातवें स्थान में गतिशील रहेंगे। 2 नवंबर तक छठे स्थान में शनि का परिभ्रमण धन लाभ के संकेत दे रहा है। किसी नए काम की रूपरेखा बन सकती है। आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होंगी। घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम होने की संभावना है। व्यापार में लाभ होगा।
मार्च से अगस्त के बीच शनि की व्रक गति स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह बन सकती है। इस दौरान संपत्ति विवाद व संतान संबंधी समस्या भी रहेगी। कारोबार में सोच-समझकर निवेश करें तो बेहतर रहेगा। 2 नवंबर से शनि आपकी राशि से सातवे स्थान पर आ जाएगा। डायबीटिज, ब्लडप्रेशर व ह्रद्य संबंधी बीमारियों से सचेत रहें।


उपाय 1- शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल या समुद्री नाव की कील से लोहे की अंगूठी बनवाएं। उसे तिल्ली के तेल में सात दिन शनिवार से शनिवार तक रखें तथा उस पर शनि मंत्र के 23000 जाप करें। शनिवार के दिन शाम के समय इसे धारण करें।
2- यह अंगूठी मध्यमा (शनि की अंगुली) में ही पहनें तथा इसके लिए पुष्य, अनुराधा, उत्तरा, भाद्रपद एवं रोहिमी नक्षत्र सर्वश्रेष्ठ है।
3- किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के तंत्रोक्त, वैदिक मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं।
मंत्र- ऊँ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।


मिथुन राशि- 2 नवंबर 2014 तक शानि मिथुन राशि से पांचवे स्थान में गतिशील रहेंगे। शनि का यह परिभ्रमण कारोबार व व्यापारिक रूप से अच्छा है परंतु स्वास्थ्य व पारिवारिक दृष्टि से इसे इतना अनुकूल नहीं कहा जा सकता। कारोबार व नौकरी में आपको आगे बढऩे के लिए नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। 3 अगस्त 2014 तक शानि की व्रक गति के कारण संतान के अध्ययन, करियर व विवाह को लेकर आप चिंतिंत रहेंगे।
परिवार व कुटुंब में किसी बात को लेकर कुछ विवाद हो सकता है, इस समय आपको अपनी सूझ-बूझ से काम लेना होगा। 2 नवंबर से शनिदेव छठे भाव में आकर आपके शत्रुओं को प्रताडि़त करेंगे। कोर्ट केस में सफलता मिल सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।


उपाय
1- शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए 7 प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित करके पक्षियों को चुगाएं।
2- बैंगनी रंग का सुगंधित रूमाल अपने पास रखें।
3- शनिदेव के सामने खड़े रहकर दर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें जिससे की शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर नहीं पड़े।
4- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।


कर्क राशि- साल 2014 में शनि आपकी राशि से चौथे व पांचवें स्थान पर भ्रमण करेंगे। 2 नवंबर तक शनि की ढैय्या की स्थिति चल रही है। काम-काज व आजीविका में उतार-चढ़ाव की स्थितियां बनेंगी। करियर में परेशानी आएगी, काम बनते-बनते अंतिम समय में जाकर अटक जाएगा। 2 मार्च से 3 अगस्त के बीच शनि अपनी वक्र गति से चलेंगे। इस समय आप किसी कोर्ट-कचहरी के झंझट में पड़ सकते हैं।
नौकरी में लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाने के कारण उच्च अधिकारियों की डांट सुननी पड़ सकती है। 2 नवंबर तक शनि की ढैय्या का प्रभाव आपकी राशि पर रहेगा, इसके पहले शत्रु आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे। अंजाने लोगों पर भरोसा न करें। घर की स्थिति भी थोड़ी तनावपूर्ण रहेगी। 2 नवंबर के बाद स्थिति थोड़ी सामान्य होने लगेगी।


उपाय 1- प्रत्येक शनिवार को शाम के समय बड़(बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सूर्योदय से पहले स्नान आदि करने के बाद कड़वे तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें।
2- काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
3- शनिवार के दिन इन10 नामों से शनिदेव का पूजन करें-
कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।
अर्थात: 1- कोणस्थ, 2- पिंगल, 3- बभ्रु, 4- कृष्ण, 5- रौद्रान्तक, 6- यम, 7, सौरि, 8- शनैश्चर, 9- मंद व 10- पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।


सिंह राशि- साल 2014 में शनिदेव 2 नवंबर तक आपकी राशि से तीसरे स्थान में भ्रमणशील रहेंगे। शनि का यह प्रभाव परिश्रम व मेहनत के बाद आपकी उन्नति को दर्शा रहा है। शनि का यह परिभ्रमण आपके स्वास्थ्य को उत्तम रखेगा। कष्ट व रोगों से निजात मिलेगी। घर-परिवार में भी वातावरण शांतिपूर्ण रहेगा। आपके शत्रु आपके विरुद्ध कोई षडय़ंत्र कर सकते हैं, सावधान रहें।
2 मार्च से 3 अगस्त के बीच आपको स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। 2 नवंबर के बाद शनि की ढैय्या आपकी राशि पर रहेगी। कोई अप्रिय घटना की स्थिति बन सकती है। मित्र व सहयोगी आपको धोखा दे सकते हैं इसलिए आंख मूंदकर किसी पर भी भरोसा न करें। धन हानि होने की भी संभावना है।


उपाय
1- काली गाय की सेवा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। उसके शीश पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांधकर धूप-आरती करनी चाहिए। फिर परिक्रमा करके गाय को बूंदी के चार लड्डू खिला दें।
2- हर शनिवार उपवास रखें। सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें। पूजन में सिंदूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें।
3- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न(नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।
4- जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।


कन्या राशि- साल 2014 में शनि की साढ़ेसाती कन्या राशि पर चल रही है। शनि का दूसरे स्थान में परिभ्रमण धन की आवक को लेकर परेशानी खड़ी करेगा। आपको शनि की साढ़ेसाती अंतिम पाद की चल रही है, जो 2 नवंबर को समाप्त हो जाएगी। इस साल आपको मेहनत व परिश्रम खूब करना पड़ेगी। दूसरे भाव में शनि के साथ राहु का प्रभाव खर्च में बढो़त्तरी कराएगा। घर के बड़े बुजुर्गों का स्वास्थ्य इस वर्ष आपकी चिंता का कारण बनेगा। व्यापार व कारोबार में भी आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। नौकरी में भी बार-बार रूकावटें आ सकती हैं।
इस दौरान अधिकारी आपके काम से संतुष्ट नहीं रहेंगे। 2 नवंबर से शनि की साढ़ेसाती समाप्त हो जाएगी। तीसरे स्थान में शनि आकर साल के अंत में आपके पराक्रम व यश को बढ़ाएंगे।

उपाय 1- शनिवार के दिन बंदरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है अथवा काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें।
2- शुक्रवार की रात काले चने पानी में भिगो दे। शनिवार को ये चने, कच्चा कोयला, हल्की लोहे की पत्ती एक काले कपड़े में बांधकर मछलियों के तालाब में डाल दें। यह टोटका पूरा एक साल करें। इस दौरान भूल से भी मछली का सेवन न करें।
3- किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के तंत्रोक्त, वैदिक मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। ये है शनि का तंत्रोक्त मंत्र-
ऊँ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम:
4- शनिवार को व्रत रखें। चींटियों आटा डालें।


तुला राशि- शनि की साढ़ेसाती साल 2014 में तुला राशि पर चल रही है। जहां शनि आपकी स्वयं की राशि में चलायमान होकर आजीविका व काम-काज में भयंकर संघर्ष उत्पन्न करेगा वहीं नौकरी में एक के बाद एक रूकावटें भी आती रहेंगी। इष वर्ष शनि आपकी राशि में स्थित है। रोजगार संबंधी समस्याएं आने की प्रबल संभावना है। कार्यक्षेत्र में छोटी-छोटी बातों पर अधिकारी व सहकर्मियों के साथ तनाव हो जाएगा।
2 मार्च से 3 अगस्त के बीच शनि व्रक गति से चलेंगे। इस समय आप किसी साजिश का शिकार हो सकते हैं। अजनबी लोगों पर एकदम से पूरा भरोसा नहीं करें। व्यर्थ की यात्राएं होंगी व परिवार में भी तनावपूर्ण स्थितियां निर्मित होंगी। 2 नवंबर से शनि दूसरे स्थान में आकर आपके लिए परेशानी उत्पन्न करेंगे। यह स्थिति आपके लिए अच्छी नहीं होगी।


उपाय
1- शनिवार के दिन सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें। इसके बाद नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसौं के तेल में छौंककर इनका भोग शनिदेव को लगाएं और अपनी समस्याओं के निवारण के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें। दूसरा सवा किलो चना कुष्ट रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से ऊतारकर किसी सुनसान स्थान पर रख आएं। इस टोटके को करने से शनिदेव के प्रकोप में अवश्य कमी होगी।
2- सवा किलो काला कोयला, एक लोहे की कील एक काले कपड़े में बांधकर अपने सिर पर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।


वृश्चिक राशि- साल 2014 में आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि गोचरवश इस साल आपकी राशि से बारहवें व आपकी ही राशि में भ्रमण करेंगे। शनि की साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव आपके करियर व एज्युकेशन को प्रभावित करेगा। नौकरी, कार्यक्षेत्र व प्लेसमेंट में एक के बाद एक समस्या व परेशानी की स्थिति रहेगी। व्यापार में भी धन हानि के योग बन रहे हैं।
बिजनेस पार्टनर और वर्करों पर आंख मूंद कर भरोसा न करें।
धन का अपव्यय होगा इसलिए इस समय में अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें, इसी के चलते आप परेशानियों से थोड़ी निजात पा सकते हैं। 2 नवंबर से शनिदेव आपकी स्वयं की राशि में आ जाएंगे, इसका नकारात्मक असर आपके स्वास्थ्य पर स्पष्ट दिखाई देगा। खान-पान, योग, व्यायाम व दिनचर्या को व्यवस्थित करें।


उपाय
1- शनिवार के दिन शनि यंत्र की स्थापना व पूजन करें। इसके बाद प्रतिदिन इस यंत्र की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। प्रतिदिन यंत्र के सामने सरसों के तेल का दीप जलाएं। नीला या काला पुष्प चढ़ाएं ऐसा करने से लाभ होगा।
2- शनिवार या शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर कुश (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठ जाएं। सामने शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें व उसकी पंचोपचार से विधिवत पूजन करें। इसके बाद रूद्राक्ष की माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम पांच माला जप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें। यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा।


धनु राशि- साल 2014 में शनिदेव पूरे साल आपकी राशि से एकादश स्थान में गतिशील रहेंगे। यह वर्ष आपके लिए लाभकारी रहेगा। इस साल आपको आर्थिक क्षेत्र में कईं शानदार उपलब्धियां मिलने की संभावना बन रही हैं। व्यापार में आप नई तकनीक का इस्तेमाल कर अपने भाग्य को चमका सकते हैं। साल 2014 में मकान, जमीन-जायदाद व स्थाई संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। इस साल आपका स्वास्थ्य भी काफी अच्छा रहेगा लेकिन मौसमी बीमारियों से सतर्क रहें।
घर-परिवार में भी स्थिति सामान्य रहेगी परंतु 2 मार्च से 3 अगस्त के बीच शनि वक्र स्थिति में रहेंगे। इस बीच आपका कोई प्रेम-प्रसंग उजागर हो सकता है, जिससे परिवार में तनाव रहेगा। किसी निकट रिश्तेदार से बिछोह हो सकता है। 3 अगस्त के बाद परिस्थितियां पक्ष में आ जाएंगी। 2 नवंबर से आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरु हो जाएगी। इसके बाद का समय आपके लिए कष्टकारी रहेगा।


उपाय
1- शनिवार के दिन किसी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनि दोष की शांति के लिए हनुमानजी से प्रार्थना करें। बूंदी के लड्डू का भोग भी लगाएं।
2- शनिवार के दिन ग्यारह साबूत नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें और शनिदेव से जीवन को सुखमय बनाने के लिए प्रार्थना करें।
3- प्रत्येक शनिवार को शाम के समय बड़(बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सूर्योदय से पहले स्नान आदि करने के बाद कड़वे तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें।
4- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न(नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।


मकर राशि- साल 2014 मकर राशि के लोगों के लिए उपलब्धियों का समय रहेगा। इस वर्ष शनिदेव 2 नवंबर 2014 तक दशम स्थान में परिभ्रमण करेंगे। रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर मिलने की संभावना है। व्यापार बढ़ाने की योजना सफल साबित होगी और धन लाभ होगा। घर-परिवार में किसी बात को लेकर तनाव रह सकता है लेकिन घबराने की कोई बात नहीं रहेगी। आप इस साल जमकर मेहनत करेंगे।
विद्यार्थियों के लिए करियर में सफलता की स्थितियां बनेंगी। 2 नवंबर से शनि एकादश भाव में आकर धन हानि के योग बना रहा है। नए निवेश से पहले सावधानी रखें। किसी भी निवेश से पहले अच्छी तरह से सोच-विचार करें अन्यथा नुकसान हो सकता है। करियर व नौकरी में लक्ष्यों को प्राप्त करने का दबाव रहेगा।


उपाय
1- शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आएं। शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के दिन किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें। शनिदेव प्रसन्न होंगे तथा शनि के कारण जितनी भी समस्याएं हैं, उनका निदान होगा।
2- काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर शनिवार के दिन श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
3- शनिवार के दिन इन10 नामों से शनिदेव का पूजन करें-

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।
अर्थात: 1- कोणस्थ, 2- पिंगल, 3- बभ्रु, 4- कृष्ण, 5- रौद्रान्तक, 6- यम, 7, सौरि, 8- शनैश्चर, 9- मंद व 10- पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।


कुंभ- साल 2014 में शनिदेव आपकी राशि से नवम स्थान में गतिशील रहेंगे। शनि का यह परिभ्रमण आपकी उन्नति में सहायक होगा। काम-काज में नई तकनीक का इस्तेमाल कर आप अपने मुनाफे को कई गुना बढ़ा सकते हैं। कुल मिलाकर कुंभ राशि के लिए यह समय उत्तरोत्तर उन्नति का है। इस समय आप सफलता की राह में निरंतर नई मंजिलें तय करेंगें। विद्यार्थियों के लिए यह समय शुभ परिणाम देने वाला रहेगा।
नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलने के योग बन रहे हैं लेकिन इन सभी के बीच अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें तो बेहतर रहेगा। 2 मार्च से 3 अगस्त के बीच शनि वक्र गति में आकर आपके स्वास्थ्य के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। इस समय में आपकी कार्यक्षमता में भी थोड़ी कमी आ सकती है। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। 2 नवंबर से शनि दशम स्थान में आकर आजीविका व काम-काज में बढ़ोत्तरी कराएंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होने का योग बन रहा है।


उपाय
1- शनिवार के दिन बंदरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है अथवा काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें।
2- शनि यंत्र के साथ नीलम या फिरोजा रत्न गले में लॉकेट की आकृति में पहन सकते हैं, यह उपाय भी उत्तम है।
3- बैंगनी रंग का सुगंधित रूमाल अपने पास रखें।
4- शनिदेव के सामने खड़े रहकर दर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें जिससे की शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर नहीं पड़े।
5- शनिवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। चोले में सरसौं या चमेली के तेल का उपयोग करें और इन तेलों से ही दीपक भी जलाएं।


मीन राशि- साल 2014 में मीन राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव 2 नवंबर तक रहेगा। काम-काज में रुकावटें आएंगी साथ ही स्वास्थ्य भी कमजोर रहेगा। स्वास्थ्य की छोटी-छोटी
समस्याएं साल भर चलती रहेंगी। नौकरी व करियर के क्षेत्र में भी कईं परेशानियों का सामना करना पड़ेगा परंतु 2 मार्च से 3 अगस्त के बीच शनि व्रत स्थिति में रहेंगे, इस बीच धन हानि के प्रबल योग बन रहे हैं। इस समय सावधान रहने की जरुरत है।
किसी अजनबी पर भरोसा न करें तो बेहतर रहेगा। विद्यार्थियों के लिए यह समय शुभ रहेगा। बृहस्पति 19 जून के बाद पंचम स्थान में आकर करियर व अध्ययन में सफलता दिलाएंगे। शनि की ढैय्या के कारण आपको खूब भटकना पड़ेगा। यह समय आपके लिए उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। 2 नवंबर से शनि की ढैय्या का प्रभाव भी समाप्त हो जाएगा। शेष वर्ष शुभ फल देने वाला रहेगा।

उपाय
1- चोकरयुक्त आटे की 2 रोटी लेकर एक तेल और दूसरी घी से चुपड़ दें। तेल वाली रोटी पर थोड़ा मिष्ठान रखकर काली गाय को खिला दें इसके बाद दूसरी रोटी भी खिला दें और शनिदेव का स्मरण करें।
2- शनिवार के दिन एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत(शनि का दान लेने वाला) को दान कर दें।
3- शनिवार के दिन किसी हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनि दोष की शांति के लिए हनुमानजी से प्रार्थना करें। बूंदी के लड्डू का भोग भी लगाएं।
4- शनिवार के दिन ग्यारह साबूत नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें और शनिदेव से जीवन को सुखमय बनाने के लिए प्रार्थना करें।
5- किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के तंत्रोक्त, वैदिक मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। ये है शनि का तंत्रोक्त मंत्र- ऊँ प्रां प्रीं स: श्नैश्चराय नम: