Diwali Par Samruddhi Dene Wale Upay - Increase Your Prosperity On Dipawali

दीपावली पर किये जाने वाले समृद्धि कारक प्रयोग

निम्नलिखित सारे प्रयोग दीपावली की रात्रि में करें।
एक लकड़ी के पटरे या चैकी पर गेहूं के सात ढेर रखें। फिर सात श्रीफल रख कर चंदन, रोली, कुमकुम पुष्प, अक्षत, कलश, धूप, दीप, पैसे आदि चढ़ा कर निम्नलिखित मंत्र का स्फटिक या सफेद हकीक की माला से जप करें। जप की समाप्ति पर समस्त सामग्री को नदी में प्रवाहित करें।
मंत्र: ¬ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा

एक कटोरी में 5 श्रीफल रखें फिर उसे गंगा जल से स्नान करा कर उसके ऊपर कलावा लपेट दें और कुमकुम, लौंग, इलायची, कपूर, अक्षत, नैवेद्य, धूप, दीप, पुष्प से उसकी पूजा करके निम्नलिखित मंत्र का कमलगट्टे की माला से जप एवं इसी मंत्र से दो माला हवन करें। जप के समाप्त होने पर श्रीफलों को अपने पूजा स्थान में रख दें।
मंत्र: ¬ श्रीं श्रियै नमः

पीले रंगे हुए चावल के ढेर पर एक मोती शंख स्थापित कर केसर, पीले अक्षत, पीले फूल, धूप, दीप, मिठाई एवं फल से उसकी पूजा करें करें। फिर निम्नलिखित मंत्र का स्फटिक या कमलगट्टे की माला से जप एवं दो माला हवन करें। जप के बाद समस्त सामग्री को जल में प्रवाहित कर दें।
मंत्र: ¬ श्रीं ह्रीं क्रों ऐं।

एक चैकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर चावल की ढेरी बनाएं। फिर उस पर लघु दक्षिण्वर्ती शंख रख कर उसका केसर, पीले अक्षत, इत्र, फूल, धूप, दीप एवं पैसे से पूजन करें। फिर निम्नलिखित मंत्र का कमलगट्टे की माला से जप करें। जप के बाद सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें।
मंत्र: ¬ ह्रीं श्रीं क्लीं त्रौलोक्य व्यापी ह्रीं श्रीं क्लीं धन वृद्धि कुरु कुरु स्वाहा।

निम्नलिखित महालक्ष्मी मंत्र का कमलगट्टे की माला से एक माला जप नित्य करें। यह क्रिया दीपावली से आरंभ करें।
मंत्र: ¬ श्रीं ह्रीं ऐं महालक्ष्म्यै कमल धारिण्यै सिंहवाहिन्यै स्वाहा।।

दीपावली की रात्रि ¬ श्रीं ऐश्वर्यलक्ष्म्यै ह्रीं नमः मंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखें। फिर इस भोजपत्र को लक्ष्मी जी के चित्र के आगे रखकर इस मंत्र का कमल गट्टे की माला पर जप करें। फिर रोली, अक्षत, धूप, दीप, इत्र, शहद से इसका पूजन कर के भोजपत्र को ताबीज में भर दाहिनी भुजा में धारण करें। सौभाग्य के लिए दीपावली की रात्रि एक चैकी पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर गेहूं से स्वस्तिक बनाएं। फिर इस स्वस्तिक पर एक थाली रखें एवं कुमकुम से ‘गं’ लिख कर इसके ऊपर श्वेतार्क गणपति और एक श्रीफल रख दें। फिर उसके सामने कुमकुम की 7 बिंदिया बनाएं। इन बिंदियों पर 7 कौड़ियां रख कर उन पर कुमकुम का तिलक लगाएं। फिर रोली, लाल चंदन, अक्षत, इत्र, धूप, दीप, मिठाई व फूल चढ़ाए और लाल चंदन की माला से निम्नलिखित मंत्र का 5 माला जप करें।
मंत्र: ¬ सर्व सिद्धि प्रदोयसि त्वं सिद्धि बुद्धि प्रदो भवः श्रीं।

इसके अगले दिन कुछ कन्याओं को पीली मिठाई का भोजन कराएं और दान दक्षिणा देकर विदा कर दें। श्वेतार्क को पूजा स्थान में रख दें और बाकी पूजन सामग्री को जल में प्रवाहित कर दें। एक चैकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर एक थाली रखें। थाली के बीच में कुमकुम से श्रीं अक्षर लिखें। फिर श्रीं के ऊपर महालक्ष्मी यंत्र रख कर पांच कौडियां रख कर। कुमकुम, रोली, चंदन, धूप, दीप, अक्षत, फल, फूल एवं कुछ पैसे चढ़ा कर पूजा करें। पूजन के बाद निम्नलिखित मंत्र का कमलगट्टे की माला से 5 माला जप करें।
मंत्र: ¬ श्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं ऐश्वर्य महालक्ष्म्यै पूर्ण सिद्धि देहि देहि नमः।

यह प्रयोग अगले दो दिनों तक करें। चैथे दिन सभी समानों को नदी में प्रवाहित कर दें। दीपावली की रात्रि चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावल से षट्कोण बनाएं। अब उस पर तांबे की एक प्लेट रख दें। फिर प्लेट में पारद लक्ष्मी स्थापित कर। कुमकुम, हल्दी, लाल चंदन रोली, केसर, अष्टगध्ं , इत्र, धपू , दीप, अक्षत, नैवेध, फल, फूल, मिठाई आदि से उसकी पूजा करें। इसके बाद एक शंख में अष्टगंध वाला जल रखें और निम्नलिखित मंत्र का कमल गट्टे की माला से एक माला जप करें। जप पूरा हो जाने पर शंख में रखा जल पारद लक्ष्मी जी के ऊपर चढ़ाएं। इस तरह जप 21 बार करें। और बचा जल घर में सभी स्थान पर छिडक़ दें ।
मंत्र: ¬ ऐं ह्रीं विजय वरदाय देवी ममः

एक चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर पारद लक्ष्मीजी को स्थापित करें। फिर 7 कौडियों को लक्ष्मीजी के ऊपर से उतारते हुए उनके चरणो में रखें। कौडियो को उतारने के समय निम्न मंत्र का जप करें।
मंत्र: ¬ श्रीं ह्रीं महालक्ष्मी मम गृहे आगच्छ स्थिर फट्।

सरसों के तेल से दरिद्रता दूर भागती है, सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और भूत-प्रेत, ऊपरी बलाएं आदि पास नहीं आ पाते। रात्रि को मुख्य पूजन में अपने बही खाते, कलम, पर्स, सोना-चांदी, रत्न, आभूषण, धन आदि रखें। विद्यार्थीगण अपनी पुस्तकें अवश्य रखें। इससे सभी कामनाएं पूरी होती हैं। इसके अतिरिक्त श्री यंत्र, एकाक्षी नारियल, श्रीफल, शंख मालाओं और सभी देवी देवताओं की मूर्तियों का भी पूजन अवश्य करें। रात्रि को ग्यारह से एक बजे के मध्य निम्नलिखित मंत्र का कमलगट्टे या स्फटिक की माला से ग्यारह बार जप करें तथा हर एक माला पूरी होने पर अपनी मनोकामना कहें।
मंत्र ¬ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः

संध्या के पश्चात काली उड़द के दो साबुत पापड़ लेकर उस पर थोड़ा सा दही और सिंदूर डाल दें और उसे पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। तिल के तेल से युक्त आटे से बना चैमुखी दीपक भी पीपल के पेड़ के नीचे जड़ के पास जला दें। अपनी मनोकामना कहें तथा कष्ट, परेशानियों को वहीं छोड़ जाने की बात कहें। सीधे घर आकर अपने हाथ-पैर धो लें। ध्यान रहे आने-जाने में कोई टोके नहीं। मनोकामना पूर्ण होगी। धन, सुख, समृद्धि में वृद्धि होगी।

रात्रि के प्रारंभ में तेल का एक दीपक घर के दरवाजे पर एक कौड़ी डालकर रखें। ग्यारह या इक्कीस दीपक अपने घर के समीप के मंदिर में रखें। तेल के ही एक सौ आठ दीपक अपने घर के खुले स्थान में चारों ओर रखें। तेल का एक बड़ा दीपक व घी के ग्यारह दीपक अपने पूजा स्थल पर रखें। एक दीपक तुलसी के समीप अवश्य रखें। पूजा स्थल पर रखे दीपक तभी प्रज्वलित करें जब पूजा का समय हो। दरवाजे पर रखे दीपक में से कौड़ी ब्रह्म मुहूर्त तक कभी भी निकाल कर अपनी तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।

दीपावली के अवसर पर श्री सूक्त का पाठ करें। श्री सूक्त की ऋचाओं का हवन करने से भी मां लक्ष्मी अपने साधकों पर प्रसन्न होती है।